गतिविधियाँ

    1) प्राचीन ग्रन्थों का सम्पादन
    2) पुस्तक प्रकाशन
    3) संस्कार पर्व
    4) Online Magazine
    5) संस्कार केन्द्र
    6) वर्त्तमान

1) संस्कृत व प्राकृत भाषा में रचित प्राचीन ग्रन्थों का सम्पादन, नवसम्पादन, अनुवाद, विवरण करना। व्याकरण, न्याय, साहित्य, धर्म विषयक प्राचीन जैन-जैनेतर शास्त्रो को, तत् तत् क्षेत्रों के विशेषज्ञ विद्वानों के द्वारा सम्पादित करवाकर प्रकाशित करना। अब तक 20 ग्रन्थ प्रकाशित हो चुके हैं।

2) गुजराती, मराठी, हिन्दी, अंग्रेजी भाषा में संस्कारवर्द्धक और प्रेरणादायक पुस्तकों, प्रवचन ग्रन्थों का सम्पादन एवं प्रकाशन करना।

  • बालकों के लिए बालभोग्य भाषा में धार्मिक कथा और ज्ञानवर्धक साहित्य।
  • युवावर्ग के लिए प्रेरक व्यक्तिविकास साहित्य।
  • आध्यात्मिकपुस्तकें।
  • पूज्यपाद आचार्यदेव श्रीमद् विजयरामचन्द्रसूरीश्वरजी महाराज का प्रवचनसाहित्य। (अबतक 20 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।)

3) प्रवचन अर्थात् व्याख्यान के द्वारा संस्कार चेतना को जाग्रत करने के लिए ‘संस्कार-पर्व’ का आयोजन। ‘संस्कार-पर्व’ एक विशिष्ट आयोजन है, जिसमें आनन्द और संस्कार का समन्वय है। हमारे प्रेरणास्रोत परम पूज्य मुनिराजश्री वैराग्यरतिविजयजी म. सा. तथा परम पूज्य मुनिराजश्री प्रशमरतिविजयजी म. सा. अपनी वाणी के द्वारा युवकों को एक नई दिशा देते हैं। व्यक्तित्व-विकास, ध्यान-विधि, मानवता, जीवदया जैसे अनेक कार्यों के द्वारा मानव-चेतना कोस्नेह के तार से जोड़ने का यह एक सुन्दर प्रयत्न है।

4) Online Magazine :- ‘संवाद’ (Samvad) प्रत्येक माह प्रकाशित होनेवाला E-magazine है, जिसमें सुन्दर प्रेरणादायक विचार आपको E-mail से मिलता रहेगा। यह एक निःशुल्क सेवा है। इसके माध्यम से आप अपने प्रेरणा-दायक विचार प्रगट कर सकते हैं। इतना ही नहीं, बल्कि अपने जीवन की समस्याओं का मानसिक और आध्यात्मिक समाधान पूज्य गुरुभगवन्तों के पास से प्राप्त कर सकते हैं।

5) प्रवचन-प्रकाशन द्वारा संस्कार केन्द्र स्थापित होनेवाला है। यहाँ आकर आप दिव्यसंस्कारों का निर्माण कर सकते हैं।


संस्कार केन्द्र में

  • विशाल पुस्तकालय-वाचनालय होगा
  • जैनधर्म के विषय में संशोधन करने के लिए अनुसन्धान केन्द्र होगा।
  • आत्मसाधना करने के लिए ध्यान केन्द्र होगा।
  • आत्मलक्षी संस्कार का निर्माण करने के लिए ‘मैत्री-धाम’ (कॉन्फ्रन्स हॉल) होगा।
  • प्राचीन सामग्रियो का संग्रहालय होगा।
  • प्राकृत-संस्कृत अभ्यास ग्रन्थ कोष होगा।
  • प्राचीन शास्त्रों के अनुसन्धान की सुविधा होगी ।

6) वर्त्तमान - प्रवचन प्रकाशन के लिए जीवन समर्पित कर देनेवाले हमारे अपने गुरुदेव प. पू. मुनिराजश्री वैराग्यरतिविजयजी म. सा. तथा प. पू. मुनिराजश्री प्रशमरतिविजयजी म. सा. के कार्यक्रमों का विवरण।

  • उनका विचरण।
  • उनकी उपस्थिति में होनेवाले धार्मिक कार्यक्रम।
  • उनके द्वारा प्रेरित कार्य।
  • संस्कार पर्वों का वर्त्तमान विवरण।

इन सभी द्वारा पूज्य मुनि भगवन्तों का सम्पर्क तुरन्त कर सकते हैं...