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‘प्रवचन-प्रकाशन’में आपका स्वागत है।

‘प्रवचन प्रकाशन’

प्र = श्रेष्ठ, उत्तम, च्छा,

वचन = वाणी, शब्द

प्रकाशन = प्रकाशित करना।

श्रेष्ठ शब्दों के द्वारा उत्तम भावों को अभिव्यक्त करना प्रवचन प्रकाशन का उद्देश्य है। देश, जाति तथा धर्म के नाम पर विभाजित मानवसमुदाय को संगठित करने का काम प्रवचन अर्थात् उत्तम शब्द ही कर सकते हैं। क्योंकि शब्द कम्युनिकेशन का एक श्रेष्ठ माध्यम है। प्रवचन प्रकाशन प्राचीन ज्ञान विरासत और आधुनिक विज्ञान के बीच एक सेतु है, अध्यात्म और विज्ञान के प्रेम का संगम प्रवचन के द्वारा ही होता है। प्रवचन प्रकाशन शब्दों के द्वारा ज्ञान, प्रेम, करुणा, सेवा और मैत्री के भावों को हमतक पहुँचाने का प्रयत्न करता है। ‘पठन घड़ी भर का, सिंचन जिन्दगी भर का’ ‘Wisdom with words’ यह प्रवचन प्रकाशन का मुद्रालेख है।

उत्तम अध्ययन जीवन का सर्वोत्तम आनन्द है। श्रेष्ठ भाषा और श्रेष्ठ विषय एक साथ पढने को मिल जाएँ तो अन्तरात्मा में प्रकाश फैल जाता है। प्रवचन प्रकाशन यही दिशा-निर्देश करना चाहता है। शब्दश्री से समृद्ध और आज्ञाधर्म से अनुबद्ध साहित्य के प्रकाशन का मुद्रालेख धारण करनेवाला प्रवचन प्रकाशन घर-घर में और घट-घट में सद् विचार और सद् भावना की सरिता प्रवाहित करेगा।